Surah 97 of 114
سُوْرَةُ الْقَدْرِ
Al-Qadr
The Power, Fate
1
हमने (इस कुरान) को शबे क़द्र में नाज़िल (करना शुरू) किया
2
और तुमको क्या मालूम शबे क़द्र क्या है
3
शबे क़द्र (मरतबा और अमल में) हज़ार महीनो से बेहतर है
4
इस (रात) में फ़रिश्ते और जिबरील (साल भर की) हर बात का हुक्म लेकर अपने परवरदिगार के हुक्म से नाज़िल होते हैं
5
ये रात सुबह के तुलूअ होने तक (अज़सरतापा) सलामती है