John Shaqi

अबू हुरैरा (रज़ि.) की कसरत-ए-रिवायत

अबू हुरैरा (रज़ि.) ने नबी (सल्ल.) की सोहबत करीब तीन साल पाई, फिर भी रिवायत में सबसे आगे (करीब 5,374 हदीसें)। उनकी अपनी व्याख्या, उमर और आइशा (रज़ि.) के सवाल, और शास्त्रीय बचाव — दोनों स्तंभ ज्यों के त्यों, फ़ैसला आपका।

By John Shaqi · July 22, 2026 · 15 min read

अबू हुरैरा (रज़ि.) की कसरत-ए-रिवायत

एक शख़्स जो पूरी नस्ल की ज़बान बना

अब्दुर्रहमान बिन सख़्र अल-दौसी (रज़ि.) — इतिहास उन्हें उस प्यार भरे लक़ब से याद करता है जो नबी करीम (सल्ल.) ने उन्हें दिया: अबू हुरैरा, यानी "बिल्ली के बच्चे वाला," उस नन्ही बिल्ली की निस्बत से जो वे अपने पास रखते थे। वे इस्लाम में देर से आए, संभवतः ख़ैबर के साल (7 हिजरी) के क़रीब, और नबी (सल्ल.) के इंतिक़ाल (11 हिजरी) तक सिर्फ़ करीब तीन बरस आप (सल्ल.) की सोहबत में रहे। मगर इन्हीं तीन बरसों से हदीस-ए-नबवी का सबसे बड़ा दरिया बहा: करीब 5,374 हदीसें उनके नाम से मंसूब हैं। जिन सहाबा (रज़ि.) ने दस, बीस या तीस साल नबी (सल्ल.) की सोहबत पाई — अबू बक्र (रज़ि.), उमर (रज़ि.), अली (रज़ि.) — उनमें से किसी की रिवायतों की तादाद इसके क़रीब भी नहीं पहुँचती।

यह हदीस के इल्म की सबसे प्राचीन बहसों में से एक है। यह सवाल ख़ुद अबू हुरैरा (रज़ि.) की ज़िंदगी में, उनके सामने उठाया गया, और उन्होंने इसका जवाब दिया। यह एक ख़लीफ़ा (रज़ि.) की तरफ़ से उठा। और कुछ जगहों पर ख़ुद उम्मुल-मोमिनीन आइशा (रज़ि.) की तरफ़ से भी। और बारह सदियों में उन उलमा ने इसका जवाब दिया जिन्होंने उनके हाफ़िज़े और उनकी दयानत का बचाव खड़ा किया। यह लेख दोनों स्तंभ साथ-साथ रखता है।

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