वे आयतें जो खो गईं
सुनन इब्न माजा की एक रिवायत कहती है कि एक सहीफ़ा हज़रत आइशा (र.अ.) के बिस्तर के नीचे रखा था, और नबी (स.अ.व.) की वफ़ात के बाद एक पालतू जानवर उसे खा गया। हम किताबें खोलते हैं: रिवायत, मुस्लिम और बुख़ारी से इसका संबंध, नस्ख़ अत-तिलावा का शास्त्रीय सिद्धांत, और सूरह अल-हिज्र का हिफ़ाज़त का वादा। फ़ैसला, हमेशा की तरह, आपका है।
By John Shaqi · July 21, 2026 · 15 min read
बिस्तर के नीचे सहीफ़ा
नबी करीम (स.अ.व.) की वफ़ात के बाद के दिनों का वह घर कल्पना कीजिए। मदीना स्तब्ध है। सहाबा शोक में डूबे हैं, दफ़न में व्यस्त हैं, और अचानक यह सवाल खड़ा है कि अब उम्मत की क़यादत कौन करेगा। एक छोटे से कमरे में, एक नीची चारपाई के नीचे, लिखने की एक तह की हुई सामग्री पड़ी है — एक "सहीफ़ा"। एक रिवायत के अनुसार जो हज़रत आइशा (र.अ.) से मंसूब है, उस पर वे शब्द लिखे थे जो कभी वही (ईश्वरीय प्रकाशना) के रूप में पढ़े जाते थे।
फिर एक पालतू जानवर — अरबी शब्द "दाजिन" है, यानी घर में पाली हुई बकरी या भेड़ — इसी अफ़रा-तफ़री में अंदर आ जाता है। और जब कोई दोबारा देखता है तो सहीफ़ा ग़ायब है। खाया जा चुका है।
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