John Shaqi

आयत-ए-हिराबा और वाक़िया-ए-उरैना — सूरह माइदा 5:33 का शान-ए-नुज़ूल

एक चरवाहा मक़्तूल, ऊँट ग़ायब, मुजरिम मदीना के बाहर तपते पत्थर पर सज़ायाफ़्ता — और उसी के पहलू में उतरी एक आयत। क्या 5:33 इस शिद्दत को रोकने आई या उसकी तसदीक़ करने? दोनों क़दीम क़िराअतें, आमने-सामने।

By John Shaqi · July 21, 2026 · 15 min read

सज़ा पहले आई या आयत?

क़ुरआन की पाँचवीं सूरत में एक आयत ऐसी है जिसकी शिद्दत के कारण फ़ुक़हा ने उसे अलग नाम दिया: आयत-ए-हिराबा, यानी "अल्लाह और उसके रसूल से जंग" की आयत। इसमें क़त्ल है, सूली है, मुख़ालिफ़ सिम्त से हाथ-पाँव काटना है, और ज़मीन से जिलावतनी है। और इसके पीछे हदीस की किताबें एक ख़ूनी सुबह रखती हैं — मदीना के बाहर सियाह पथरीली ज़मीन (हर्रा) पर पेश आया वाक़िया-ए-उरैना व उक्ल।

एक चरवाहा मक़्तूल पड़ा था। ऊँट ग़ायब थे। जिन लोगों ने यह किया उन्हें पकड़ लिया गया, और बदले में जो उनके साथ हुआ उसने चौदह सदियों से पढ़ने वालों को बेचैन रखा है: हाथ-पाँव काट दिए गए, आँखें गर्म लोहे से दाग़ दी गईं, जिस्म तपते पत्थर पर छोड़ दिए गए कि वे पानी माँगते रहे और पानी न मिला।

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