John Shaqi

बनू क़ुरैज़ा: 600–900 की संख्या कहाँ से आई?

इब्न इसहाक़ के अनुसार 600 से 900 पुरुष मारे गए, मगर क़ुरआन और सिहाह सित्ता कोई संख्या नहीं देते। 1976 में अराफ़ात ने इस संख्या को चुनौती दी और किस्टर ने परंपरा का बचाव किया। दोनों स्तंभ पाठों समेत आपके सामने — फ़ैसला आपका।

By John Shaqi · July 23, 2026 · 15 min read

बनू क़ुरैज़ा: 600–900 की संख्या कहाँ से आई?

मदीना के बाज़ार में खाइयाँ

सन 5 हिजरी है — 627 ईस्वी। मदीना की घेराबंदी ख़त्म हो चुकी है और क़ुरैश व ग़तफ़ान की सेनाएँ रेगिस्तान में लौट चुकी हैं। मगर शहर के भीतर एक क़ौम के लिए जंग अभी ख़त्म नहीं हुई। बनू क़ुरैज़ा — मदीना का आख़िरी बड़ा यहूदी क़बीला — अपने क़िलों में घिरा हुआ है। जब वे नीचे उतरते हैं, तो उनकी क़िस्मत एक घायल आदमी के हाथ में दे दी जाती है — साद बिन मुआज़, उनके पुराने सहयोगी क़बीले औस के सरदार।

इसके बाद जो हुआ, उसे पैग़म्बर के सबसे पहले पूर्ण जीवनी-लेखक इब्न इसहाक़ ने उन शब्दों में लिखा जो बारह सदियों से गूँज रहे हैं: मदीना के बाज़ार में खाइयाँ खोदी गईं, और छह सौ से नौ सौ पुरुषों की गर्दनें मारी गईं।

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