मूसा और मलकुल-मौत: बुख़ारी 1339 का थप्पड़, निकली हुई आँख और हज़ार साल के जवाब
सहीह बुख़ारी 1339 और सहीह मुस्लिम 2372 बयान करती हैं कि मूसा ने मौत के फ़रिश्ते को थप्पड़ मारा और उसकी आँख निकाल दी। इब्न क़ुतैबा से इब्न हजर तक शारेहीन सदियों एतराज़ और जवाब लिखते रहे। पाठ आपके सामने हैं — फ़ैसला आपका।
By John Shaqi · July 23, 2026 · 15 min read

एक फ़रिश्ता आया — और एक आँख खोकर लौटा
दृश्य वही है जो रिवायत खुद खींचती है। एक नबी — वही जिसने तूर पहाड़ पर अल्लाह से बात की, जिसकी लाठी के इशारे पर समुद्र फट गया, जिसने तौरात की तख़्तियाँ अपने हाथों में उठाईं — अपनी ज़िंदगी के आख़िरी दौर में है। मौत का फ़रिश्ता (मलकुल-मौत) उसकी तरफ़ भेजा जाता है। फ़रिश्ता दरवाज़े पर पहुँचता है। और रूह क़ब्ज़ होने से पहले एक हाथ चलता है। फ़रिश्ता एक आँख से महरूम होकर अपने रब की तरफ़ लौटता है और शिकायत करता है: तूने मुझे ऐसे बंदे की तरफ़ भेजा है जो मरना नहीं चाहता।
यह किसी हाशिये की लोक-कथा नहीं है। यह सहीह बुख़ारी में दर्ज है — वह किताब जिसे अहले-सुन्नत क़ुरआन के बाद सबसे सहीह किताब मानते हैं — हदीस नंबर 1339 के तौर पर, जो किताब अहादीसुल-अंबिया में 3407 पर दोहराई गई, और सहीह मुस्लिम में हदीस 2372 के तौर पर भी मौजूद है। हज़ार साल से ज़्यादा समय से पाठक इस रिवायत पर ठिठक कर रुकते आए हैं, और हज़ार साल से उलमा इसके उठाए सवालों के जवाब लिखते आए हैं।
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