ऊँट के पेशाब का इलाज — सहीह रिवायत, तहारत की फ़िक़्ह, और तिब्ब-ए-नबवी की बहस
बुख़ारी व मुस्लिम की एक सहीह रिवायत ऊँट का दूध और पेशाब पीने वाले बीमार लोगों का ज़िक्र करती है। पाठ, तहारत की फ़िक़्ह, और तिब्ब-ए-नबवी की बहस, अगल-बगल। फ़ैसला आपका।
By John Shaqi · July 22, 2026 · 15 min read

एक अप्रत्याशित जगह पर लिखा हुआ इलाज
कुछ इलाज इसलिए याद रखे जाते हैं कि उन्होंने क्या शिफ़ा दी। यह इलाज इसलिए याद रखा जाता है कि यह कहाँ लिखा है। सहीह बुख़ारी में, वह किताब जिसे अहल-ए-सुन्नत की रिवायत क़ुरआन के बाद सबसे ज़्यादा प्रामाणिक मानती है, एक संक्षिप्त रिवायत उन बीमार लोगों का ज़िक्र करती है जिन्हें ऊँटों का दूध और पेशाब पीने को कहा गया, और वे सेहतमंद हो गए। फिर वही रिवायत यह भी बताती है कि उन लोगों ने बाद में क्या किया, और उनके साथ क्या किया गया। यह उन चंद हदीसों में से है जो बुख़ारी के तीन अलग-अलग अध्यायों, यानी वुज़ू, ज़कात और तिब्ब, में आती है, और सहीह मुस्लिम में भी।
सदियों से यह रिवायत एक दोराहे पर खड़ी है। फ़ुक़हा इससे यह तय करते हैं कि कोई चीज़ पाक है या नापाक। पुराने दौर के हकीमों ने इसे उस विधा में रखा जिसे वे "तिब्ब-ए-नबवी" कहते थे। आज के समर्थक इसे अपने समय से आगे का इलाज क़रार देते हैं। आज के आलोचक इसे इस बात की चेतावनी समझते हैं कि पाठ को दवाख़ाना न बनाया जाए। और इन सबके बीच ख़ुद पाठ खड़ा है, अपरिवर्तित, पढ़े जाने का प्रतीक्षारत।
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