सात हर्फ़ का मसला: क़ुरआन सात हर्फ़ों पर उतरा — वे सात क्या थे?
बुख़ारी और मुस्लिम की हदीस: क़ुरआन सात हर्फ़ों पर नाज़िल हुआ। वे सात क्या थे? तबरी और इब्न अल-जज़री के जवाब, उस्मानी मानक पाठ, और आज की दस क़िराअतें — पाठ जस के तस, फ़ैसला आपका।
By John Shaqi · July 21, 2026 · 15 min read
मस्जिद-ए-नबवी में चादर पकड़ ली गई
मदीना, पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ के जीवनकाल का समय। उमर बिन अल-ख़त्ताब (रज़ि.) — जिन्हें ख़ुद नबी ﷺ ने क़िराअत सिखाई थी — नमाज़ में खड़े हैं और हिशाम बिन हकीम (रज़ि.) को सूरह अल-फ़ुरक़ान पढ़ते सुन रहे हैं। मगर हिशाम उन शब्दों और तरीक़ों पर पढ़ रहे हैं जो उमर (रज़ि.) को कभी सिखाए ही नहीं गए। उमर (रज़ि.) ने बाद में अपनी हालत ख़ुद बयान की: क़रीब था कि मैं नमाज़ ही में उन पर झपट पड़ता। वे बमुश्किल सलाम तक रुकते हैं — फिर हिशाम की चादर पकड़कर उन्हें अल्लाह के रसूल ﷺ के पास ले जाते हैं।
इसके बाद जो हुआ वह इस्लाम की सबसे प्रामाणिक किताबों — बुख़ारी और मुस्लिम — में सुरक्षित है। नबी ﷺ ने दोनों की क़िराअत सुनी, दोनों को सही ठहराया, और फ़रमाया: यह क़ुरआन सात हर्फ़ों पर नाज़िल किया गया है। इसी एक वाक्य ने वह सवाल खोल दिया जिस पर मुस्लिम विद्वान चौदह सदियों से काम कर रहे हैं: वे सात हर्फ़ थे क्या? और आज कहाँ हैं?
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