John Shaqi

हदीस-ए-सक़लैन: "क़ुरआन और मेरे अहले-बैत" या "क़ुरआन और मेरी सुन्नत"?

सहीह मुस्लिम में विदाई के शब्द हैं "अल्लाह की किताब और मेरे अहले-बैत", जबकि मुवत्ता इमाम मालिक में "अल्लाह की किताब और उसके नबी की सुन्नत" — मगर बिना किसी सनद के। हम दोनों पक्षों की किताबें, सनदें और पारंपरिक बचाव ज्यों के त्यों सामने रखते हैं; फ़ैसला आपका।

By John Shaqi · July 22, 2026 · 15 min read

हदीस-ए-सक़लैन: "क़ुरआन और मेरे अहले-बैत" या "क़ुरआन और मेरी सुन्नत"?

एक विदाई, दो किताबें, दो वाक्य

अपने जीवन के आख़िरी साल में इस्लाम के नबी ﷺ हज़ारों सहाबा के सामने खड़े हुए और फ़रमाया कि मेरे जाने का समय क़रीब है, और मैं तुम्हारे बीच कुछ छोड़े जा रहा हूँ — जिसे थामे रखोगे तो कभी गुमराह न होगे। इस बात पर धरती का हर मुसलमान सहमत है। इस विदाई संदेश के दोनों प्रसिद्ध पाठ पहली चीज़ पर भी सहमत हैं: अल्लाह की किताब। मतभेद सिर्फ़ दूसरी चीज़ पर है।

सहीह मुस्लिम खोलिए — जो अहले-सुन्नत के निकट क़ुरआन के बाद सबसे प्रामाणिक किताबों में से है — तो दूसरी चीज़ है "मेरे अहले-बैत"। मुवत्ता इमाम मालिक खोलिए — जो हदीस की सबसे पुरानी संकलित किताबों में से है — तो दूसरी चीज़ है "उसके नबी की सुन्नत"। एक पाठ शिया अक़ीदे की बुनियाद बना, दूसरा अहले-सुन्नत के ख़ुत्बों का शायद सबसे ज़्यादा दोहराया जाने वाला वाक्य। आज का सवाल सीमित है और किताबों से ही उत्तर पाने योग्य: कौन से शब्द सनद की दृष्टि से ज़्यादा मज़बूत हैं?

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