Surah 93 of 114
سُوْرَةُ الضُّحٰي
Ad-Dhuhaa
The Morning Hours
1
(ऐ रसूल) पहर दिन चढ़े की क़सम
2
और रात की जब (चीज़ों को) छुपा ले
3
कि तुम्हारा परवरदिगार न तुमको छोड़ बैठा और (न तुमसे) नाराज़ हुआ
4
और तुम्हारे वास्ते आख़ेरत दुनिया से यक़ीनी कहीं बेहतर है
5
और तुम्हारा परवरदिगार अनक़रीब इस क़दर अता करेगा कि तुम ख़ुश हो जाओ
6
क्या उसने तुम्हें यतीम पाकर (अबू तालिब की) पनाह न दी (ज़रूर दी)
7
और तुमको एहकाम से नावाकिफ़ देखा तो मंज़िले मक़सूद तक पहुँचा दिया
8
और तुमको तंगदस्त देखकर ग़नी कर दिया
9
तो तुम भी यतीम पर सितम न करना
10
माँगने वाले को झिड़की न देना
11
और अपने परवरदिगार की नेअमतों का ज़िक्र करते रहना