John Shaqi

बद्र के बाद क़त्ल: नज़्र बिन हारिस और उक़्बा बिन अबी मुऐत — क़ैदी या मुजरिम?

बद्र के लगभग सत्तर बंदियों में से केवल दो रास्ते में क़त्ल किए गए — एक वह क़िस्सागो जो अपनी कहानियाँ क़ुरआन के मुक़ाबिल रखता था। इब्न इस्हाक़, बुख़ारी और तफ़सीर के पाठ ज्यों के त्यों, दोनों पक्षों के तर्कों के साथ। फ़ैसला आपका।

By John Shaqi · July 24, 2026 · 15 min read

बद्र के बाद क़त्ल: नज़्र बिन हारिस और उक़्बा बिन अबी मुऐत — क़ैदी या मुजरिम?

दो क़ैदी जो मदीना नहीं पहुँच सके

रमज़ान, 2 हिजरी — मार्च 624 ईस्वी। बद्र के कुएँ पीछे छूट चुके हैं। क़ुरैश के लगभग सत्तर आदमी रस्सियों में बंधे, विजयी क़ाफ़िले के साथ मदीना की ओर चल रहे हैं। इनमें से लगभग सब ज़िंदा रहेंगे: कोई फ़िदया देकर छूटेगा, कोई बिना फ़िदये के, और कोई मदीना के बच्चों को लिखना-पढ़ना सिखाकर। लेकिन इस क़ाफ़िले के दो आदमी मदीना कभी नहीं देखेंगे। सफ़रा नाम के पड़ाव पर एक क़ैदी को क़तार से अलग कर उसका सिर क़लम कर दिया जाता है। एक मंज़िल आगे, इर्क़ अज़-ज़ब्या पर, दूसरा क़ैदी भी उसी अंजाम को पहुँचता है। पहला, नज़्र बिन हारिस, मक्का में एक अनोखी वजह से मशहूर था: वह रुस्तम और इस्फ़ंदियार के फ़ारसी क़िस्से सुनाता और दावा करता था कि उसकी कहानियाँ मुहम्मद (सल्ल.) के पढ़े हुए कलाम से बेहतर हैं। दूसरा, उक़्बा बिन अबी मुऐत, सहीह बुख़ारी में नाम-ब-नाम मौजूद है — मक्की दौर के दो सबसे भयावह दृश्यों में।

बाक़ी सब छोड़ दिए गए तो ये दो क्यों क़त्ल हुए? क्या यह उस क़िस्सागो से बदला था जिसने अपनी कहानियाँ क़ुरआन के मुक़ाबिल रखी थीं — या उन दो आदमियों की सज़ा जिन्हें किताबें मक्का के सबसे बड़े अपराधी बताती हैं?

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