बर्मिंघम के पन्ने: क्या यह दुनिया का सबसे पुराना क़ुरआन है?
बर्मिंघम यूनिवर्सिटी के दो चर्मपत्र (parchment) पन्ने, जिनकी रेडियोकार्बन तिथि 568-645 ईस्वी निकली — पैग़म्बर मुहम्मद के जीवनकाल का ज़माना, बल्कि उससे भी पहले तक। कुछ ने इसे पुष्टि कहा, कुछ ने सावधानी की सलाह दी। दोनों पक्ष जस के तस, फ़ैसला आपका।
By John Shaqi · July 21, 2026 · 15 min read
बर्मिंघम की एक ख़ामोश लाइब्रेरी
बात 2015 की गर्मियों की है। ब्रिटेन के शहर बर्मिंघम की यूनिवर्सिटी में कैडबरी रिसर्च लाइब्रेरी के ठंडे, ख़ामोश कमरे में मध्य-पूर्व की हज़ारों पांडुलिपियाँ सदियों की धूल ओढ़े पड़ी थीं। यह संग्रह "मिंगाना कलेक्शन" कहलाता है — इराक़ में जन्मे कल्दानी विद्वान अल्फ़ोंस मिंगाना ने 1920 के दशक में चॉकलेट के मशहूर व्यापारी एडवर्ड कैडबरी की आर्थिक मदद से ये पांडुलिपियाँ मध्य-पूर्व से इकट्ठा की थीं। लगभग नब्बे साल तक ये पन्ने एक साधारण कैटलॉग नंबर के नीचे पड़े रहे।
फिर एक शोधकर्ता, अल्बा फ़ेदेली, अपनी डॉक्टरेट के काम के सिलसिले में इन्हीं पांडुलिपियों की रूटीन जाँच और सूचीकरण कर रही थीं कि उनकी नज़र ठहर गई। एक क़ुरआनी पांडुलिपि के साथ जिल्द में बंधे दो पन्ने बाक़ी पांडुलिपि से अलग थे — लिपि अलग, हाथ अलग, अंदाज़ अलग। उन्होंने सुझाव दिया कि इन दो पन्नों को अलग से परखा जाए। यूनिवर्सिटी ने चर्मपत्र का एक नन्हा-सा टुकड़ा ऑक्सफ़ोर्ड की रेडियोकार्बन प्रयोगशाला को भेज दिया।
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