John Shaqi

ख़बर-ए-वाहिद और अक़ीदा: क्या एक रावी की हदीस से अक़ीदा साबित हो सकता है?

एक आदमी यमन की तरफ़ रवाना हुआ और एक पूरे इलाक़े का अक़ीदा उसके साथ था। सदियों बाद मकातिब-ए-फ़िक्र एक सवाल पर बँट गए: क्या एक भरोसेमंद सनद से आई हदीस अक़ीदे की बुनियाद बन सकती है? हनफ़ी और मोतज़िली उसूली किताबें कहती हैं कि ज़न्न पर अक़ीदा क़ायम नहीं होता; अहल-ए-हदीस जवाब देते हैं कि सहाबा ने कभी यह फ़र्क़ नहीं किया।

By John Shaqi · July 22, 2026 · 15 min read

ख़बर-ए-वाहिद और अक़ीदा: क्या एक रावी की हदीस से अक़ीदा साबित हो सकता है?

अकेला क़ासिद

हिजरत के दसवें साल रसूल अल्लाह (सल्ल.) ने मुआज़ बिन जबल (रज़ि.) को यमन रवाना किया। न कोई लश्कर, न कोई वफ़्द — सिर्फ़ एक आदमी। सहीह बुख़ारी (हदीस 1395) के मुताबिक़ उन्हें जो हिदायतें दी गईं उनकी शुरुआत टैक्स या मुआहिदों से नहीं बल्कि ख़ुद अक़ीदे से हुई:

«إِنَّكَ تَأْتِي قَوْمًا مِنْ أَهْلِ الْكِتَابِ، فَادْعُهُمْ إِلَى شَهَادَةِ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَنِّي رَسُولُ اللَّهِ»

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