John Shaqi

सना की पांडुलिपियाँ: सबसे पुरानी क़ुरआनी प्रति की मिटाई गई लिखावट क्या बताती है?

1972 में सना की जामा मस्जिद की छत से प्राचीन क़ुरआनी प्रतियों का ख़ज़ाना मिला। इनमें एक पांडुलिपि DAM 01-27.1 दो परतों वाली है — और नीचे की मिटाई गई लिखावट मानक क़ुरआन से भिन्न है। पांडुलिपि क्या दिखाती है, दोनों पक्षों के विद्वानों ने क्या कहा, और क़ुरआन की सुरक्षा के परंपरागत स्रोत क्या कहते हैं — सब आपके सामने।

By John Shaqi · July 21, 2026 · 15 min read

छत के अंदर छिपा ख़ज़ाना

1972 में भारी बारिशों ने यमन के शहर सना की जामा मस्जिद कबीर को नुक़सान पहुँचाया — यह दुनिया की सबसे पुरानी मस्जिदों में से एक है, जिसकी नींव इस्लामी परंपरा के अनुसार ख़ुद पैग़ंबर मुहम्मद के ज़माने में रखी गई। मरम्मत के दौरान मज़दूरों ने छत और सीलिंग के बीच की दीवार खोली तो एक भूला-बिसरा खोखला हिस्सा निकल आया, जिसमें पुराने चर्मपत्र (parchment) और काग़ज़ के दसियों हज़ार पन्ने दबे पड़े थे — नम, चिपके हुए, जर्जर। मज़दूरों ने ये पन्ने आलू की क़रीब बीस बोरियों में भरे और मस्जिद की सीढ़ियों पर रख दिए।

यमन के पुरातत्व विभाग के प्रमुख क़ाज़ी इस्माइल अल-अकवा ने पहचान लिया कि इन बोरियों में क्या है: क़रीब एक हज़ार प्राचीन क़ुरआनी प्रतियों के टुकड़े। 1981 में जर्मन सरकार की आर्थिक मदद से बहाली की परियोजना शुरू हुई, और दो जर्मन शोधकर्ताओं — गेर्ड-रुडिगर पुइन और हांस-कास्पर ग्राफ़ फ़ॉन बोटमर — ने बरसों यह सामग्री साफ़ की, क्रम में लगाई और इसकी हज़ारों तस्वीरें सुरक्षित कीं।

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