John Shaqi

उस्मान (रज़ि.) की तदवीन-ए-क़ुरआन: सहीफ़े, कमेटी और जलाए गए मसाहिफ़

बुख़ारी 4987 में हुज़ैफ़ा (रज़ि.) की पुकार, उस्मान (रज़ि.) की कमेटी, सूबों को भेजी गई प्रतियाँ — और बाक़ी सभी मसाहिफ़ जलाने का हुक्म दर्ज है। इब्न मसऊद (रज़ि.) का एतराज़ और पारंपरिक बचाव भी स्रोतों में है। सब कुछ ज्यों का त्यों।

By John Shaqi · July 21, 2026 · 15 min read

सरहद से आने वाला सवार

आर्मीनिया और अज़रबैजान की मुहिमों में शाम (सीरिया) और इराक़ की फ़ौजें कंधे से कंधा मिलाकर लड़ रही थीं कि हुज़ैफ़ा बिन अल-यमान (रज़ि.) ने वह मंज़र देखा जिसने उन्हें दुश्मन से ज़्यादा डरा दिया: सिपाही क़ुरआन अलग-अलग तरीक़ों से पढ़ रहे थे, और हर गुट अपनी क़िराअत को सही और दूसरे की क़िराअत को ग़लत कह रहा था। हुज़ैफ़ा (रज़ि.) ने इंतज़ार नहीं किया। वे मदीना पहुँचे, ख़लीफ़ा उस्मान बिन अफ़्फ़ान (रज़ि.) के पास गए और वे शब्द कहे जो सहीह बुख़ारी ने चौदह सदियों से सुरक्षित रखे हैं:

يَا أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ أَدْرِكْ هَذِهِ الأُمَّةَ قَبْلَ أَنْ يَخْتَلِفُوا فِي الْكِتَابِ اخْتِلاَفَ الْيَهُودِ وَالنَّصَارَى

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