John Shaqi

इकरिमा, इब्न अब्बास के मौला: झूठ और ख़ारिजियत के इल्ज़ाम — बुख़ारी का भरोसा, मुस्लिम का परहेज़

इब्न उमर ने अपने मौला नाफ़े से कहा: "मुझ पर झूठ न बाँधना जैसे इकरिमा ने इब्न अब्बास पर बाँधा।" फिर भी बुख़ारी ने अपनी सहीह इकरिमा की रिवायतों से भर दी, जबकि मुस्लिम ने सिर्फ़ एक रिवायत ली। किताबों में इल्ज़ाम भी महफ़ूज़ हैं और बचाव भी — फ़ैसला आपका है।

By John Shaqi · July 23, 2026 · 15 min read

इकरिमा, इब्न अब्बास के मौला: झूठ और ख़ारिजियत के इल्ज़ाम — बुख़ारी का भरोसा, मुस्लिम का परहेज़

नाफ़े को दी गई चेतावनी

मदीना, पहली सदी हिजरी के आख़िरी दशक। अब्दुल्लाह इब्न उमर — दूसरे ख़लीफ़ा के बेटे, और सहाबा में रिवायत के मामले में सबसे सावधान हस्तियों में से एक — अपने आज़ाद किए हुए ग़ुलाम नाफ़े से मुख़ातिब हैं। यह वही नाफ़े हैं जिनसे आगे चलकर हदीस की मशहूर "सिलसिलतुज़-ज़हब" यानी सुनहरी सनद (मालिक, अन नाफ़े, अन इब्न उमर) गुज़रती है। इब्न उमर जो कहते हैं वह जर्ह-ओ-तादील की बड़ी किताबों में महफ़ूज़ है, और यह कोई आम नसीहत नहीं — इसमें एक शख़्स का नाम लिया गया है।

वह शख़्स हैं इकरिमा, अब्दुल्लाह इब्न अब्बास के मौला (आज़ाद किए हुए ग़ुलाम) — वही इब्न अब्बास जिन्हें "तर्जुमानुल-क़ुरआन" कहा जाता है। कोई भी क्लासिकी तफ़सीर खोलिए, इकरिमा का नाम हर जगह मिलेगा: "इकरिमा, अन इब्न अब्बास।" मगर इब्न उमर के शब्द, जिन्हें अल-मिज़्ज़ी ने तहज़ीबुल-कमाल में और अल-ज़हबी ने मीज़ानुल-एतिदाल में दर्ज किया, यह हैं:

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