किनाना इब्न अल-रबीअ: ख़ैबर का ख़ज़ाना, सीने पर आग और सनद का सवाल
इब्न इसहाक़ लिखते हैं कि ख़ैबर के ख़ज़ाने के सवाल पर किनाना इब्न अल-रबीअ के सीने पर आग जलाई गई और फिर गर्दन मारी गई — मगर इस रिवायत की कोई सनद नहीं, और सहीह बुख़ारी में आग से अज़ाब की स्पष्ट मनाही मौजूद है। दोनों पक्षों के पाठ ज्यों के त्यों प्रस्तुत हैं; फ़ैसला पाठक का है।
By John Shaqi · July 24, 2026 · 15 min read

एक आदमी के सीने पर आग
मुहर्रम 7 हिजरी — मई 628 ईस्वी। उत्तरी अरब की सबसे धनी यहूदी बस्ती ख़ैबर के क़िले एक-एक करके फ़तह हो चुके हैं। बंदियों में एक युवा सरदार खड़ा है: किनाना इब्न अल-रबीअ इब्न अबी अल-हुक़ैक़ — बनू नज़ीर के मशहूर ख़ज़ाने का अमीन और युवा सफ़िय्या बिन्त हुयय का पति। उसे पैग़म्बर-ए-इस्लाम के सामने लाया जाता है और एक ही सवाल होता है: ख़ज़ाना कहाँ है? इसके बाद जो कुछ हुआ, वह सीरत की सबसे पुरानी किताब में चंद पंक्तियों में दर्ज है — और इन्हीं चंद पंक्तियों में एक खंडहर है, एक दफ़न ख़ज़ाना है, एक सीने पर जलती आग है, और एक तलवार। बारह सदियों से ये चंद पंक्तियाँ दो बिल्कुल अलग तरीक़ों से पढ़ी जा रही हैं।
यह लेख किसी धर्म का मज़ाक़ नहीं उड़ाता। हम वही करेंगे जो हमेशा करते हैं: किताबें खोलेंगे, पाठ ज्यों के त्यों प्रस्तुत करेंगे, और तीन सवाल पूछेंगे: इब्न इसहाक़ और तबरी ने असल में क्या लिखा? क्या यह रिवायत मुहद्दिसीन की कसौटी पर खरी उतरती है? और ख़ुद मुसलमान फ़ुक़हा ने इस घटना से क्या क़ानूनी नतीजे निकाले? फ़ैसला, हमेशा की तरह, आपका है।
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