John Shaqi

मक्खी वाली हदीस — एक पर में बीमारी, दूसरे में शिफ़ा (बुख़ारी 3320)

बुख़ारी 3320: मक्खी मशरूब में गिरे तो उसे पूरा डुबो दो — एक पर में बीमारी, दूसरे में शिफ़ा। सहीह सनद, मुतनाज़ा मज़मून। मतन पर ऐतराज़ और रिवायती दिफ़ा, दोनों कॉलम ज्यों के त्यों।

By John Shaqi · July 22, 2026 · 15 min read

मक्खी वाली हदीस — एक पर में बीमारी, दूसरे में शिफ़ा (बुख़ारी 3320)

एक पर में बीमारी, दूसरे में शिफ़ा

हदीस के ज़ख़ीरे में शायद ही कोई मुख़्तसर रिवायत इतनी जदीद तवज्जोह खींचती हो जितनी मक्खी और प्याले के बारे में यह हिदायत। एक मक्खी आपके मशरूब में गिर जाए, और रिवायत कहती है कि उसे महज़ ऊपर से झटक न दो — पूरा उसे डुबो दो, फिर निकाल कर फेंक दो, क्योंकि उसके एक पर में बीमारी है और दूसरे में शिफ़ा। यह रिवायत अहल-ए-सुन्नत के सबसे मोतबर मजमूए सहीह अल-बुख़ारी में है, और उसे एक ऐसी सनद ने उठाया जिसे मुहद्दिसीन ने सहीह क़रार दिया।

और ठीक इसी लिए कि यह अपनी नक़ल में भी मुस्तनद है और अपने मज़मून में भी चौंका देने वाली, यह एक बहुत पुराने सवाल की क्लासिकी मिसाल बन गई है। जब कोई रिवायत एक ऐसी सनद से पहुँचे जिसे उलमा बे-ऐब कहें, मगर उसके अल्फ़ाज़ क़ारी को मुशाहिदा-शुदा तिब्ब के ख़िलाफ़ महसूस हों, तो किस पर भरोसा किया जाए — सनद पर, या मज़मून पर? यह मज़मून इसका फ़ैसला नहीं करता। यह मतन, सनद, ऐतराज़ और दिफ़ा को बिल्कुल उसी तरह रखता है जैसे हर फ़रीक़ उसे बयान करता है।

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