रैहाना बिन्त ज़ैद: पत्नी या दासी? इब्न इस्हाक़ और इब्न साद की विरोधाभासी रिवायतें
बनू क़ुरैज़ा के पतन के बाद रैहाना नाम की एक विधवा इस्लाम के पैग़म्बर के घराने में दाख़िल हुई। इब्न इस्हाक़ कहते हैं कि वह अंत तक दासी रही और पहले इस्लाम से इनकार किया; इब्न साद लिखते हैं कि उन्हें आज़ाद करके मेहर के साथ निकाह किया गया। इस्लाम के दो सबसे प्राचीन जीवनीकार दो अलग कहानियाँ सुनाते हैं — पाठ आपके सामने हैं।
By John Shaqi · July 24, 2026 · 15 min read

क़ुरैज़ा के खंडहरों में एक विधवा
मदीना, 627 ई. के आरंभिक दिन — हिजरत का पाँचवाँ साल। बनू क़ुरैज़ा की घेराबंदी ख़त्म हो चुकी है। क़बीले के मर्द मदीने के बाज़ार में क़त्ल किए जा चुके हैं; औरतें और बच्चे बंदी बना लिए गए हैं। इन्हीं बंदियों में एक नौजवान विधवा खड़ी है जिसका पति अभी बाक़ी मर्दों के साथ मारा गया है। उसका नाम रैहाना है।
चंद ही दिनों में वह इस्लाम के पैग़म्बर के घराने में है। इस बात पर सबसे प्राचीन स्रोत सहमत हैं। लेकिन उसके बारे में लगभग बाक़ी हर बात पर सहमत नहीं। क्या वह पत्नी थी, जिससे मेहर और विदाई के साथ निकाह हुआ? या दासी, जो अंत तक बंदी की हैसियत में रही? क्या उसने इस्लाम क़बूल किया, इनकार किया, या पहले इनकार किया और बाद में क़बूल किया? उसके पिता का नाम अम्र था या ज़ैद? वह ख़ुद बनू क़ुरैज़ा की थी या बनू नज़ीर की बेटी जो क़ुरैज़ा में ब्याही गई थी? इस्लाम के दो सबसे प्राचीन जीवनीकार — इब्न इस्हाक़ और इब्न साद — ऐसे जवाब देते हैं जो ज्यों के त्यों दोनों सच नहीं हो सकते।
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